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अमेरिकी हमले के बाद ईरान का अहम तेल द्वीप ‘ऑर्फ़न पर्ल’ धधका, खाड़ी में मचा हड़कंप

मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव के बीच ईरान के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण खार्ग द्वीप (Kharg Island) पर अमेरिकी हमले के बाद आग लगने की खबर सामने आई है। यह द्वीप ईरान के कुल तेल निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा संभालता है, इसलिए इस पर हुए हमले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

अमेरिकी हमले के बाद द्वीप के तेल ढांचे में आग लगने की सूचना मिली है। इस घटना के बाद फारस की खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके बड़े असर की आशंका जताई जा रही है।


छोटा द्वीप, लेकिन ईरान की तेल अर्थव्यवस्था की रीढ़

खार्ग द्वीप फारस की खाड़ी के उत्तरी हिस्से में स्थित है और यह ईरान के बुशहर प्रांत की मुख्य भूमि से लगभग 28 किलोमीटर दूर है। यह द्वीप करीब 20 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और लगभग 8 किलोमीटर लंबा तथा 5 किलोमीटर चौड़ा है।

भौगोलिक रूप से छोटा होने के बावजूद यह द्वीप ईरान की तेल अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां बड़े-बड़े तेल भंडारण टैंक, लोडिंग टर्मिनल और पाइपलाइन नेटवर्क मौजूद हैं, जिनके माध्यम से कच्चा तेल वैश्विक बाजारों तक भेजा जाता है।

खार्ग द्वीप को तीन प्रमुख अपतटीय तेल क्षेत्रों — अबूज़ार, फ़ोरोज़ान और दुरूद — से कच्चा तेल मिलता है। इसके अलावा ईरान के बड़े तेल क्षेत्रों अहवाज़, मारून और गचसरन से पाइपलाइन सीधे इस द्वीप के भंडारण टैंकों तक जाती हैं। यहां हर साल करीब 95 करोड़ बैरल कच्चे तेल का प्रबंधन किया जाता है।


क्यों महत्वपूर्ण है खार्ग द्वीप

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार खार्ग द्वीप ईरान की सरकार और उसकी सैन्य गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए भी बेहद अहम है। अगर इस द्वीप पर नियंत्रण कमजोर पड़ता है या तेल निर्यात प्रभावित होता है, तो ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है।

इतिहास की बात करें तो 1960 और 1970 के दशक में ईरान के तेल उद्योग के विस्तार के दौरान खार्ग द्वीप का बड़े पैमाने पर विकास किया गया था। उस समय ईरान के कई तटीय इलाके बड़े तेल टैंकरों के लिए पर्याप्त गहरे नहीं थे, इसलिए खार्ग द्वीप को मुख्य तेल निर्यात केंद्र के रूप में विकसित किया गया।


ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व भी

तेल के अलावा खार्ग द्वीप का ऐतिहासिक महत्व भी है। यहां 7वीं शताब्दी के मीर मोहम्मद तीर्थस्थल, प्राचीन शिलालेख, पारसी और ईसाई कब्रिस्तान, सस्सानीद काल के मकबरे और 1747 में बना डच किला जैसे कई ऐतिहासिक अवशेष मौजूद हैं।


अमेरिका का सैन्य दबाव बढ़ा

रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी भी बढ़ा दी है। पेंटागन ने जापान में तैनात उभयचर हमला जहाज USS Tripoli को करीब 2,500 मरीन सैनिकों के साथ क्षेत्र में भेजा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने द्वीप पर स्थित कई सैन्य ठिकानों पर बमबारी की है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल तेल ढांचे को पूरी तरह नष्ट करने का फैसला नहीं लिया गया है।


होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ा तनाव

इस बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में परिचालन लगभग बंद कर दिया है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी रास्ते से होता है

इस स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है।


ईरान की चेतावनी

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर क़लीबाफ़ ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर ईरानी द्वीपों पर हमला हुआ तो देश “सभी संयम छोड़ देगा”। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी संभावित जवाबी कार्रवाई के लिए अमेरिका जिम्मेदार होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है, तो इसका असर न केवल मध्य-पूर्व बल्कि पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

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